-
आज का चिंतन #270 *संभावना और आशंका…* भविष्य के बारे में जब भी हम सोचते हैं तो हमें कभी सकारात्मक तो कभी नकारात्मक विचार आते हैं। जब अच्छे विचार आते हैं तो आने वाले समय में हमें बहुत सारी संभावनाएं नजर आती हैं, हमारी ऊर्जा और उत्साह में वृद्धि होती है। किंतु जब खराब विचार…
-
कॉल बैक… आज का चिंतन #269 कॉल बैक… कई बार हम कॉल अटेंड नहीं कर पाते या हमसे कॉल मिस हो जाता है तो पहली फुर्सत में कॉल बैक करना एक सामान्य शिष्टाचार तो है ही और साथ ही साथ यह संवाद की निरंतरता को बनाए रखने के लिए भी अनिवार्य होता है। विश्वसनीयताफोन हमारे…
-
🎈आज का चिंतन #268 *अपेक्षा और मोह…* अपेक्षा सदैव दूसरों से होती है कि वह ऐसा करे, या ऐसा नहीं करे, ऐसा बोले या ऐसा नहीं बोले, इस तरह से बोले इत्यादि।मोह हमारे अंदर उपजता है, व्यक्ति या वस्तुओं के प्रति। मोह के वशीभूत होकर क्रिया या प्रतिक्रिया हमारे द्वारा होती है और उसमें बुद्धि,…
-
आज का चिंतन #267 *स्वतंत्रता और स्वच्छंदता…* हम कुछ करना चाहें और उसके लिए कोई रोक रुकावट ना हो, कोई दबाव न हो, हम स्व विवेक और स्वेच्छा से, स्व सुविधा से कार्य कर पाएं, यह हमारी स्वतंत्रता होती है। स्वतंत्रतापूर्वक कार्य करते समय हम नीति, नियम, अनुशासन, धर्म, मर्यादा के अनुकूल आचरण, व्यवहार करते…
-
आज का चिंतन #266 आवाज की दुनिया के दोस्तों… व्हाट्सएप के द्वारा और लोगों से प्राप्त संदर्भों के माध्यम से, नए-नए लोगों से बातचीत हुई और दूरसंचार पर इस तरह से लोगों से एक अनोखा संबंध स्थापित हुआ और इनको कहा गया आवाज की दुनिया के दोस्तों… संकोच..ज्यादातर यह देखा और सुना गया है कि…
-
-
01/04/2025 आज का चिंतन #264 *कार्यस्थल पर…* कार्यालय हो, व्यापार हो, फैक्ट्री हो, या कोई भी कार्य स्थल हो वहां पर लोगों से चाहे अनचाहे हमारे परस्पर संबंध बनते ही हैं। *संबंधों में मर्यादा*सगे संबंधी हों या सामाजिक संबंध हों या व्यावसायिक और कार्यालयीन संबंध हों, सभी में मर्यादा होती है कि हर किसी से,…
-
आज का चिंतन #263 लेखा जोखा… आज वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन प्रयास रहता है कि सभी का लेना देना पूरा कर लें ताकि लाभ हानि की सही स्थिति सामने आ जाए।नये वित्तीय वर्ष में व्यापार की कहानी का नए सिरे से प्रारंभ होगा। प्रतिदिन जीवन…जीवन में कर्मों का हिसाब प्रतिक्षण हो रहा है इसलिए…
-
🍡आज का चिंतन #262 *आईना साफ करता रहा …* एक मशहूर शेर पढ़ा था कि ग़ालिब यही भूल उम्र भर करता रहा धूल चेहरे पर थी आईना साफ करता रहा।यानी करना कुछ चाहिए और कर कुछ और रहे हैं, और समझ रहे हैं कि हम सही कर रहे हैं, जबकि वास्तविकता में जो करना चाहिए,…
-
*मिलना ही क्यों है* आज जब संचार, संप्रेषण और संवाद के अनेक माध्यम जैसे मोबाइल, व्हाट्सएप, इंस्टा इत्यादि उपलब्ध हो गए हैं तो प्रश्न आता है कि किसी से जाकर मिलने की आवश्यकता ही क्या है? *व्यक्तिगत संपर्क* जब हम व्हाट्सएप चैट करते हैं या फोन पर बातचीत करते हैं, तब बौद्धिक चर्चा हो जाती…