• आज का चिंतन # 340 खोज और संघर्ष… सिद्धार्थ गौतम सत्य की खोज में निकले और बुद्ध हो गए। क्रिस्टोफर कोलंबस भारत की खोज में निकले और उन्होंने अमेरिका को खोज लिया। खोज प्रयास पूर्वक होती है और संघर्ष जीवन का स्वाभाविक अंग या हिस्सा होता है। अनपेक्षित, आकस्मिक..जीवन में सब कुछ हमारी सोच के…

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  • आज का चिंतन # 339 रुचि…. इंट्रेस्ट… एक कथन है कि नथिंग इस इंटरेस्टिंग इफ यू आर नॉट इंटरेस्टेड अर्थात यदि आपकी रुचि नहीं है तो कोई भी चीज रुचिकर नहीं है। एक ही निश्चित प्रकार की वस्तु, व्यक्ति, क्रिया या वातावरण के प्रति, हर व्यक्ति का आकर्षण या रुचि भिन्न-भिन्न होती है और यह…

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  • आज का चिंतन # 338 कितनी जानकारी?… हर तरह की, हर प्रकार की जानकारी इकट्ठा करना, सामान्य ज्ञान की प्रतियोगिता के लिए तो आवश्यक माना जा सकता है; किंतु दिन-प्रतिदिन के जीवन में कितनी जानकारी इकट्ठा करें? जीवन में जानकारी से ज्यादाअनुभव या अनुभूति का होना,आवश्यक और लाभदायक होता है। अनुभव और अनुभूति..जो कुछ भी…

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  • आज का चिंतन # 337 मैसेज का महत्व… किसी भी कार्य के संबंध में चर्चा, विमर्श इत्यादि के लिए प्रत्यक्ष भेंट या रूबरू मुलाकात सर्वोत्तम होती है; लेकिन यदि यह संभव न हो तो फोन पर बातचीत, चर्चा करना आवश्यक और महत्वपूर्ण होता है; और यदि किसी कारण से बात नहीं हो पाई है तो…

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  • आज का चिंतन # 336 गहरे पानी पैठ…जिन खोजा तिन पाइयां, गहरे पानी पैठ,मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ।।आजकल व्यस्तता, दिखावे, भागमभाग, होड़, प्रतिस्पर्धा के जीवन में हम विस्तार और फैलाव में रम गए हैं और ठहरकर, केंद्रित होकर, तसल्ली से गहराई में जाकर; पढ़ना, करना, सोचना, जानना कदाचित भूल गए हैं और तब…

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  • आज का चिंतन # 335 मैसेज नहीं…. फोन करें… कोई भी जरूरी बात, मैसेज, विषय या चर्चा हो तो केवल व्हाट्सएप मैसेज ना करके सबसे पहले फोन करना चाहिए ताकि दो तरफा संवाद हो जाए और कार्य अच्छे से, समय से, पूरी तरह से हो जाए। यदि किसी कारण से फोन पर बात न हो…

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  • आज का चिंतन # 334 शब्दों की ताकत…शब्द अभिव्यक्ति का माध्यम हैं। शब्दों से ही संवाद किया भी जाता है और संवाद प्रभावित भी होता है इसलिए शब्दों का उपयोग बहुत ही सजगतापूर्वक किया जाना चाहिए और दूसरों के द्वारा बोले गए शब्दों के पीछे छुपे हुए अर्थ को समझने में भी सतर्कता रखनी चाहिए।…

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  • आज का चिंतन # 333 कार्य और व्यवस्था… हमारा हर एक कार्य अधिकतर किसी न किसी व्यवस्था जैसे पारिवारिक, सामाजिक, कार्यालयीन या संस्थागत आदि के अधीन होता है (यदि वह निजी कार्य न हो तो) और इस प्रकार के कार्य के लिखित अलिखित नियम कायदे इत्यादि होते हैं जिनका समझदारी और जिम्मेदारी से पालन किया…

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  • आज का चिंतन # 332 समय देना पड़ता है.. आज दौड़ भाग की जिंदगी में बहुत तेजी है; वाहनों की गति तेज, सामान की सप्लाई तेज, सूचना का संप्रेषण तत्काल इत्यादि। लेकिन कुछ अच्छा सोचने, समझने और करने के लिए, समय देना ही पड़ता है। प्रकृति..प्रकृति के अपने नियम हैं और अपनी गति है। सृजन…

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  • आज का चिंतन # 331 प्राप्त और प्राप्य.. प्राप्त अर्थात जो हमें मिला है, किसी ने हमको दिया है, जैसे हमको सम्मान प्राप्त हुआ, धन प्राप्त हुआ, साधन और सुविधाएं प्राप्त हुई इत्यादि।प्राप्य अर्थात जिसे हम प्राप्त कर सकते हैं अपनी शक्ति द्वारा, अपने कौशल द्वारा जैसे परीक्षा में सफलता, कार्य में प्रवीणता इत्यादिऔर इस…

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