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आज का चिंतन #280 याद न जाए, बीते दिनों की… एक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई किखराब यादों और बातों को बगिया के खरपतवार की तरह से उखाड़ फेंकिए लेकिन जनाब इतना आसान है नहीं जितना लिखने में लगता है।यथार्थ और आदर्श में बहुत अंतर है जी। यादें…स्मृतियां.. कई सारी.. कुछ मधुर स्मृतियां, कुछ कटु स्मृतियां। जितना…
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आज का चिंतन #279 पासवर्ड बदलिए… कंप्यूटर में ऑनलाइन में जहां भी हमारा खाता होता है वहां यह व्यवस्था होती है कि एक नियमित अंतराल के उपरांत पासवर्ड बदलना अनिवार्य होता है। पासवर्ड बदला जाना हमारी जानकारी की निजता की सुरक्षा के लिए होता है।मानवीय संबंधों में भी धारणा रूपी पासवर्ड का समय-समय पर बदला…
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आज का चिंतन #278 बंधन और बाधा… बंधन मन के होते हैं और बाधाएं परिस्थितियों के कारण होती है। मन पर विजय पाना मुश्किल होता है इसीलिए मन के बंधनों को तोड़ना भी कठिन होता है, लेकिन इससे निकलने के उपाय होते हैं। वहीं दूसरी ओर हिम्मत, साहस, जुनून, जोश, दृढ़ता, एकाग्रता, धैर्य, समझदारी, सहयोग…
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आज का चिंतन #277 प्रसन्नता का उत्सव… सुख और दुख हमारे जीवन में धूप और छांव की तरह आते जाते रहते हैं। खुशी के क्षण गुजर जाते हैं और हम उनको महत्व नहीं देते, लेकिन दुख की बातों पर विचार और चर्चा, अनावश्यक रूप से हम करते रहते हैं। परिणाम स्वरुप जीवन में दुख ज्यादा…
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🍡आज का चिंतन #276 समस्या – चुनौती – अवसर… जीवन में बहुत से क्षण और परिस्थितियों ऐसी होती हैं जब हमें समस्या नजर आती है या हम स्वयं को समस्याओं से घिरा हुआ महसूस करते हैं और ऐसे में हम असहज होते हैं, परेशान होते हैं, घबरा जाते हैं, डर जाते हैं, दुखी होते हैं।…
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आज का चिंतन #275 संघर्ष, शांति, संतुष्टि… संघर्ष क्या है एक युद्ध स्वयं के विरुद्ध।जीवन में रुकावट दूसरों के कारण कम, और स्वयं के विचारों के कारण ज्यादा होती है। स्वयं के विचार, कार्य और मानसिकता को हर क्षण, सजग और सचेत रहते हुए, पूर्ण रूप से, सही रूप में हम रख पाएं, यह सार्थक…
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आज का चिंतन #274 अविरोध ही स्वीकार्यता… जीवन के झूले की रस्सी अनुकूलता और प्रतिकूलता के सिरों पर बंधी रहती है। पूर्ण रूप से अनुकूलता और प्रतिकूलता वास्तविक रूप में कभी नहीं होती किंतु हमारे विचार ही इसका पैमाना तय करते हैं। स्वीकार्यता…जीवन में हर एक व्यक्ति, वस्तु, स्थिति को पूरी तरह स्वीकार किया जा…
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शेयर कर दो… 🪄 आज का चिंतन #273 *शेयर कर दो…* बांटने से दुख आधा होता है और सुख दुगना होता है। कई मामलों में हम आत्मनिर्भर होते हैं लेकिन अधिकतर मामलों में हम परस्पर निर्भर होते हैं। मन में यदि कुछ भरा हुआ है तो उसे खाली कर देना ही अच्छा होता है। *हल्के…
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संग्रहालय 🍫आज का चिंतन #272 *संग्रहालय…* वस्तुओं किताबें इत्यादि को संग्रहालय में संभाल कर रखा जाता है और उन्हें प्रदर्शित किया जाता है कि लोग उन्हें देखकर, पढ़कर जानें, सीखें और प्रेरणा प्राप्त करें।हम अपने घर, दिमाग और कंप्यूटर आदि उपकरणों में भी वस्तुओं और जानकारी का संग्रह करके रखते हैं ताकि बाद में उनका…
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आज का चिंतन #271 दाल में कंकर… कभी-कभी किसी व्यक्ति की खराब बात या व्यवहार से हम आहत होते हैं और उसके प्रति हमारा व्यवहार सामान्य नहीं रह पाता। हालांकि उसने कइयों बार हमारे साथ अच्छी बातें और व्यवहार किए है किंतु उसकी कुछ खराब बातें हमें अखर जाती हैं। मंशा..हमें हमेशा यह देखना चाहिए…