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आज का चिंतन #290 हर दिन प्रयत्न… दूसरे हमारे साथ क्या करते हैं यह हमारे नियंत्रण में नहीं होता, लेकिन हम स्वयं के साथ क्या करते हैं, यह पूरी तरह हमारे नियंत्रण में होता है। स्वयं के विचार, कार्य, प्रयास, यत्न, प्रयत्न इत्यादि दिन की सार्थकता…यदि हमने अपनी संतुष्टि के लिए, कुछ मन का किया,…
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आज का चिंतन #289 मैसेज भेज देते… कई बार हम किसी को फोन करते हैं और बात नहीं हो पाती है। बाद में जब बात होती है तो सामने वाला कहता है कि कम से कम मैसेज तो भेज देते। मैसेज का प्रभाव…फोन हमारे लिए है हम फोन के लिए नहीं है। इसीलिए जब कभी…
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आज का चिंतन #288 जवाबी पत्र… पहले समाचारों का जो आदान-प्रदान खतों के माध्यम से होता था वह आजकल व्हाट्सएप के माध्यम से होने लगा है। खत अपनी भाषा में, अपने विचार और भावनाओं का प्रस्तुतीकरण होते थे। शब्दों के माध्यम से पूरा दृश्य प्रस्तुत कर दिया जाता था और कहते थे कि लौटती डाक…
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आज का चिंतन #287 उस से जमती है… जब किसी व्यक्ति से हमारा मन मिलता है, हम अपनी निजी बातें तक उस से शेयर कर पाते हैं, तब हम कहते हैं कि उससे मेरी जमती है..और यदि किसी से हमारे विचार, मान्यता, रुचियों, प्राथमिकताओं इत्यादि में अंतर, भिन्नता या विपरीतता होती है तो हम कहते…
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आज का चिंतन #286 पुकार लो… हेमंत कुमार के एक प्रसिद्ध गीत की पंक्तियां हैं तुम्हारा इंतजार है, तुम पुकार लो…कैसी विडंबना है कि मैं तुम्हें चाहता हूं, मुझे तुम्हारा इंतजार है, लेकिन मेरी अपेक्षा है कि तुम मुझे पुकार लो…शायद यह संकोच भी हो सकता है, या अहंकार भी, कुछ पता नहीं.. जीवन में…यदि…
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आज का चिंतन #285 *सत्य कैसे कहें…* सत्य बोलने के लिए सहजता, सरलता, निर्मलता और आत्म बल की आवश्यकता होती है। लाभ हानि का गणित सत्य के स्वरूप को बदल देता है। डर अथवा स्वार्थ का प्रभाव, सत्य के प्रस्तुतिकरण पर अवश्य पड़ता है। *रुकावट…*सत्य बोलने में सबसे बड़ी रुकावट हमारे मन की आशंकाएं होती…
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आज का चिंतन #284 रिश्तों को बचाना… जीवन में कुछ रिश्ते बने हुए होते हैं जैसे कि मां-बाप, जीवनसाथी, बच्चे, रिश्तेदार, पड़ोसी इत्यादि और कुछ रिश्ते बनाए जाते हैं जैसे मित्र, विभागीय सहकर्मी, सामाजिक समूह के व्यक्तियों से संबंध इत्यादि। रिश्तों की शक्ति…यदि रिश्तों में सहयोग की भावना, विचारों में समानता, समर्पण का भाव होता…
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आज का चिंतन #283 *अपना ख्याल रखें…* हम किसी के लिए शुभेच्छा व्यक्त करते हैं कि कृपया अपना ख्याल रखिएगा तो आशय यह होता है कि अपने स्वास्थ्य का और अपने जीवन की महत्वपूर्ण बातों का ख्याल रखिएगा। *महत्व की बातें*_पहला सुख निरोगी काया_ शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ अच्छा मानसिक स्वास्थ्य भी बहुत आवश्यक होता…
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आज का चिंतन #282 उदारमना… कई बार हम दूसरों सेखुलकर बोल नहीं पाते, मिल नहीं पाते।डरते हैं कि कोई हमारा फायदा न उठा ले,कोई हमें धोखा न दे दे,कोई हमारे रहस्य न जान ले इत्यादि।कदाचित विश्वास से अधिक भयऔर सहजता से अधिक संदेहके वातावरण में हम अपना जीवन जीते हैं। उदारता…यदि हम उदारता पूर्वक व्यवहार…
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आज का चिंतन #281 बता दीजिएगा… प्रायः यह देखा गया है कि काम करने के बाद यदि संबंधित को उसकी जानकारी नहीं दी तो बहुधा वह कार्य संपन्न होने के बारे में जान ही नहीं पाता है और उसको इस विषय में सूचना प्राप्त होने की प्रतीक्षा बनी रहती है। उत्तरदायित्व..कार्य हो जाने के बाद…