• आज का चिंतन #322 दोनों बातें… हमें दोनों तरह की बातों काध्यान रखना चाहिए कि हमेंक्या करना चाहिएऔर क्या नहीं करना चाहिएक्या बोलना चाहिएऔर क्या नहीं बोलना चाहिएकहां जाना चाहिए औरकहां नहीं जाना चाहिए इत्यादि समझदारी..मात्र यह समझ लेना कि हमेंक्या करना है, क्या बोलना हैकहां जाना है इत्यादिपर्याप्त नहीं होता है यदि हमारे अंदरयह

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  • आज का चिंतन # 321 हर समस्या का समाधान… गणित में बताया जाता है कि हर समस्या का कोई न कोई हल अवश्य होता है। समीकरण के हल अद्वितीय अर्थात यूनिक, एकाधिक अर्थात एक से ज्यादा या अनंत अर्थात इंफाईनाइट हो सकते हैं लेकिन कोई भी हल ना हो, ऐसा नहीं होता। इसी प्रकार जीवन

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  • आज का चिंतन # 320 किया तो था… यदि कोई काम अधूरा दिखे तो हम पूछते हैं कि यह काम तुमने नहीं किया तो जवाब मिलता है किया तो था। वस्तुतः होता यह है कि उसने काम तो किया है लेकिन उसे पूरा नहीं किया या कोई रुकावट आई और उसने काम छोड़ दिया और

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  • आज का चिंतन # 319 अनावश्यक सत्य वचन… यह विषय इस बात से संबंधित है कि हम लोग संबंधों में, आपसी व्यवहार और बातचीत में, सोशल मीडिया इत्यादि में पूर्व में कभी भी कहीं भी, जो हो चुका है, घट चुका है, उसके बारे में ऐसी बातें करते हैं जो सत्य तो हैं लेकिन कतई

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  • आज का चिंतन # 318 क्या हुआ था… बातचीत में कई बार देखने में आता है कि लोग अपना और दूसरे का, बहुत सारा समय और ऊर्जा, यह बतलाने में व्यर्थ कर देते हैं कि क्या हुआ था…इस संबंध में एक फिल्मी गीत की यह पंक्तियां याद आती है किये क्या हुआ, कैसे हुआ, कब

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  • आज का चिंतन # 317 व्यक्तिगत मैसेज… जब भी किसी से व्यक्तिगत मैसेज प्राप्त होता है तो उसका जवाब अवश्य दिया जाना चाहिए या आवश्यकता अनुसार उससे फोन पर बातचीत कर लेना चाहिए। यहां व्यक्तिगत मैसेज से आशय है कि उसका लिखा हुआ संदेश न कि कोई फॉरवार्डेड मैसेज। व्यक्तिगत मैसेज का निहितार्थ यह होता

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  • आज का चिंतन # 316 बताईएगा अवश्य… जब हम दूसरों को कोई काम करने के लिए देते हैं तो यह अपेक्षा स्वाभाविक रूप से होती है कि वह एक निश्चित समय बाद हमें बतला दें कि काम हुआ या नहीं या कितना हुआ है इत्यादि। और यदि उनसे कोई सूचना प्राप्त नहीं होती है तो

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  • आज का चिंतन # 315 उतना नहीं… एक कुत्ते को जोर-जोर से रोते देख शिष्य ने संत से पूछा कि कुत्ता क्यों रो रहा है तो संत ने बताया कि वह जहां बैठा है वहां कोई नुकीली चीज उसे चुभ रही है, शिष्य ने पूछा तो वह वहां से उठ क्यों नहीं जाता, संत बोले

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  • आज का चिंतन #314 धन्यवाद… आपका… यदि किसी ने हमारे लिए कुछ अच्छा कहा है, किया है या बताया है तो हमें उनका धन्यवाद अवश्य करना चाहिए। धन्यवाद प्रकट करना न केवल विनम्रता और शिष्टता होती है, बल्कि यह हमारे व्यक्तित्व का आयाम भी होता है। कृतज्ञता..धन्यवाद देना यदि व्यवहार का एक लक्षण है तो

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  • आज का चिंतन # 313 काम दो तरह के … एक काम वह होता है जिससे केवल हम प्रभावित होते हैं और दूसरा वह काम, जिससे दूसरे भी प्रभावित होते हैं। हमारे निजी कार्यों में कुछ ऊंच नीच हो जाए तो नफा नुकसान केवल हमारा ही है लेकिन यदि दूसरे से संबंधित काम में कुछ

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