आज का चिंतन
Daily blogs for everyday musings
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शेयर कर दो… 🪄 आज का चिंतन #273 *शेयर कर दो…* बांटने से दुख आधा होता है और सुख दुगना होता है। कई मामलों में हम आत्मनिर्भर होते हैं लेकिन अधिकतर मामलों में हम परस्पर निर्भर होते हैं। मन में यदि कुछ भरा हुआ है तो उसे खाली कर देना ही अच्छा होता है। *हल्के
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संग्रहालय 🍫आज का चिंतन #272 *संग्रहालय…* वस्तुओं किताबें इत्यादि को संग्रहालय में संभाल कर रखा जाता है और उन्हें प्रदर्शित किया जाता है कि लोग उन्हें देखकर, पढ़कर जानें, सीखें और प्रेरणा प्राप्त करें।हम अपने घर, दिमाग और कंप्यूटर आदि उपकरणों में भी वस्तुओं और जानकारी का संग्रह करके रखते हैं ताकि बाद में उनका
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आज का चिंतन #271 दाल में कंकर… कभी-कभी किसी व्यक्ति की खराब बात या व्यवहार से हम आहत होते हैं और उसके प्रति हमारा व्यवहार सामान्य नहीं रह पाता। हालांकि उसने कइयों बार हमारे साथ अच्छी बातें और व्यवहार किए है किंतु उसकी कुछ खराब बातें हमें अखर जाती हैं। मंशा..हमें हमेशा यह देखना चाहिए
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आज का चिंतन #270 *संभावना और आशंका…* भविष्य के बारे में जब भी हम सोचते हैं तो हमें कभी सकारात्मक तो कभी नकारात्मक विचार आते हैं। जब अच्छे विचार आते हैं तो आने वाले समय में हमें बहुत सारी संभावनाएं नजर आती हैं, हमारी ऊर्जा और उत्साह में वृद्धि होती है। किंतु जब खराब विचार
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कॉल बैक… आज का चिंतन #269 कॉल बैक… कई बार हम कॉल अटेंड नहीं कर पाते या हमसे कॉल मिस हो जाता है तो पहली फुर्सत में कॉल बैक करना एक सामान्य शिष्टाचार तो है ही और साथ ही साथ यह संवाद की निरंतरता को बनाए रखने के लिए भी अनिवार्य होता है। विश्वसनीयताफोन हमारे
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🎈आज का चिंतन #268 *अपेक्षा और मोह…* अपेक्षा सदैव दूसरों से होती है कि वह ऐसा करे, या ऐसा नहीं करे, ऐसा बोले या ऐसा नहीं बोले, इस तरह से बोले इत्यादि।मोह हमारे अंदर उपजता है, व्यक्ति या वस्तुओं के प्रति। मोह के वशीभूत होकर क्रिया या प्रतिक्रिया हमारे द्वारा होती है और उसमें बुद्धि,
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आज का चिंतन #267 *स्वतंत्रता और स्वच्छंदता…* हम कुछ करना चाहें और उसके लिए कोई रोक रुकावट ना हो, कोई दबाव न हो, हम स्व विवेक और स्वेच्छा से, स्व सुविधा से कार्य कर पाएं, यह हमारी स्वतंत्रता होती है। स्वतंत्रतापूर्वक कार्य करते समय हम नीति, नियम, अनुशासन, धर्म, मर्यादा के अनुकूल आचरण, व्यवहार करते
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आज का चिंतन #266 आवाज की दुनिया के दोस्तों… व्हाट्सएप के द्वारा और लोगों से प्राप्त संदर्भों के माध्यम से, नए-नए लोगों से बातचीत हुई और दूरसंचार पर इस तरह से लोगों से एक अनोखा संबंध स्थापित हुआ और इनको कहा गया आवाज की दुनिया के दोस्तों… संकोच..ज्यादातर यह देखा और सुना गया है कि
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01/04/2025 आज का चिंतन #264 *कार्यस्थल पर…* कार्यालय हो, व्यापार हो, फैक्ट्री हो, या कोई भी कार्य स्थल हो वहां पर लोगों से चाहे अनचाहे हमारे परस्पर संबंध बनते ही हैं। *संबंधों में मर्यादा*सगे संबंधी हों या सामाजिक संबंध हों या व्यावसायिक और कार्यालयीन संबंध हों, सभी में मर्यादा होती है कि हर किसी से,