आज का चिंतन

Daily blogs for everyday musings

  • आज का चिंतन #293 दो घर की देहरी… घर से जिम या पार्क, बाद में कार्यस्थल, बाजार और वापस घर, बस प्रतिदिन इतना ही जाना आना रह गया है। मिलने जुलने के लिए किसी के घर जाना न्यूनतम हो गया है। वर्ष भर में कितने ऐसे दिन होते हैं जब हम अपने घर के अलावा

    Read more →

  • आज का चिंतन #292 उपाय क्या है… दैनिक जीवन में बहुत सी समस्याएं आती है, विपरीत परिस्थितियों से जूझना पड़ता है, अवांछित घटनाएं होती हैं, अप्रिय व्यवहार के प्रसंग होते हैं, मन विचलित होता है तो ऐसे में परेशान या निराश होने की बजाय हमें सोचना चाहिए कि उपाय क्या है… हमारे नियंत्रण में…जो कुछ

    Read more →

  • आज का चिंतन #291 जीरो मेमोरी… अच्छी याददाश्त होना एक विशेष गुण होता है, लेकिन क्या सभी बातें याद रखी जा सकती हैं, क्या सभी बातों का याद रखा जाना आवश्यक है? भूल जाना…भूल जाना भी एक विशेष गुण होता हैदिमाग में याद रखने की अपनी सीमा हैऐसे में जब तक पुराना भूलेंगे नहींतब तक

    Read more →

  • आज का चिंतन #290 हर दिन प्रयत्न… दूसरे हमारे साथ क्या करते हैं यह हमारे नियंत्रण में नहीं होता, लेकिन हम स्वयं के साथ क्या करते हैं, यह पूरी तरह हमारे नियंत्रण में होता है। स्वयं के विचार, कार्य, प्रयास, यत्न, प्रयत्न इत्यादि दिन की सार्थकता…यदि हमने अपनी संतुष्टि के लिए, कुछ मन का किया,

    Read more →

  • आज का चिंतन #289 मैसेज भेज देते… कई बार हम किसी को फोन करते हैं और बात नहीं हो पाती है। बाद में जब बात होती है तो सामने वाला कहता है कि कम से कम मैसेज तो भेज देते। मैसेज का प्रभाव…फोन हमारे लिए है हम फोन के लिए नहीं है। इसीलिए जब कभी

    Read more →

  • आज का चिंतन #288 जवाबी पत्र… पहले समाचारों का जो आदान-प्रदान खतों के माध्यम से होता था वह आजकल व्हाट्सएप के माध्यम से होने लगा है। खत अपनी भाषा में, अपने विचार और भावनाओं का प्रस्तुतीकरण होते थे। शब्दों के माध्यम से पूरा दृश्य प्रस्तुत कर दिया जाता था और कहते थे कि लौटती डाक

    Read more →

  • आज का चिंतन #287 उस से जमती है… जब किसी व्यक्ति से हमारा मन मिलता है, हम अपनी निजी बातें तक उस से शेयर कर पाते हैं, तब हम कहते हैं कि उससे मेरी जमती है..और यदि किसी से हमारे विचार, मान्यता, रुचियों, प्राथमिकताओं इत्यादि में अंतर, भिन्नता या विपरीतता होती है तो हम कहते

    Read more →

  • आज का चिंतन #286 पुकार लो… हेमंत कुमार के एक प्रसिद्ध गीत की पंक्तियां हैं तुम्हारा इंतजार है, तुम पुकार लो…कैसी विडंबना है कि मैं तुम्हें चाहता हूं, मुझे तुम्हारा इंतजार है, लेकिन मेरी अपेक्षा है कि तुम मुझे पुकार लो…शायद यह संकोच भी हो सकता है, या अहंकार भी, कुछ पता नहीं.. जीवन में…यदि

    Read more →

  • आज का चिंतन #285 *सत्य कैसे कहें…* सत्य बोलने के लिए सहजता, सरलता, निर्मलता और आत्म बल की आवश्यकता होती है। लाभ हानि का गणित सत्य के स्वरूप को बदल देता है। डर अथवा स्वार्थ का प्रभाव, सत्य के प्रस्तुतिकरण पर अवश्य पड़ता है। *रुकावट…*सत्य बोलने में सबसे बड़ी रुकावट हमारे मन की आशंकाएं होती

    Read more →

  • आज का चिंतन #284 रिश्तों को बचाना… जीवन में कुछ रिश्ते बने हुए होते हैं जैसे कि मां-बाप, जीवनसाथी, बच्चे, रिश्तेदार, पड़ोसी इत्यादि और कुछ रिश्ते बनाए जाते हैं जैसे मित्र, विभागीय सहकर्मी, सामाजिक समूह के व्यक्तियों से संबंध इत्यादि। रिश्तों की शक्ति…यदि रिश्तों में सहयोग की भावना, विचारों में समानता, समर्पण का भाव होता

    Read more →