आज का चिंतन
Daily blogs for everyday musings
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आज का चिंतन #303 तोरा मन दर्पण कहलाए.. तोरा मन दर्पण कहलाएभले बुरे सारे कर्मों को, देखे और दिखाए।सही बात है कि मन से कुछ छुपा नहीं है।और मन ज्यों का त्यों, सब कुछ दिखा देता है।मन से कुछ छुपाया नहीं जा सकता और झुठलाया भी नहीं जा सकता सही गलत…जब भी हम कुछ करते
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आज का चिंतन 302 परखना और समझना वस्तुओं को परखा जाता हैऔर व्यक्तियों, प्रकृति औरपरिस्थितियों को समझा जाता है।वस्तुओं की परख उनकी गुणवत्ता और उनके मूल्य के निर्धारण के लिए की जाती है। व्यक्ति और प्रकृति..ईश्वर द्वारा रचित यह सृष्टि ही प्रकृति है और मनुष्य इसका एक अवयव है, हिस्सा है। प्रकृति से हमारा कभी
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आज का चिंतन #301 क्षमता, दक्षता और विशिष्टता हर व्यक्ति हर कार्य नहीं कर सकता या दूसरे शब्दों में कहें तो हर कार्य के लिए उसकी क्षमता न्यूनतम से अधिकतम तक के स्तर की हो सकती है। जिस कार्य में उसकी क्षमता अधिक या कम होती है तदनुसार उसमें उसकी रुचि भी अधिक या कम
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आज का चिंतन #300 संबंध…अनिवार्य प्राकृतिक संबंध जैसे पारिवारिक अर्थात माता-पिता पति-पत्नी बच्चे रिश्तेदार, ऑफिस में सहकर्मी, उच्च अधिकारी इत्यादि, समाज में पड़ोसी इत्यादि, इनको निभाने की मर्यादाएं प्रचलित हैं, परिभाषित हैं। मन के संबंध…जो संबंध वर्जनाओं से मुक्त होते हैं, वही मन के संबंध होते हैं और सबसे अधिक सरल, सहज, निर्मल और परस्पर
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आज का चिंतन #299 करो और जानो… किसी बेरोजगार युवा से चर्चा करते समय विषय आया कि कुछ करना चाहिए। ध्यान में आया कि जब हम लोगों से खुलकर बातचीत करते हैं तब हमें उनकी परेशानियां का, समस्याओं का पता चलता है और फिर उसके समाधान के लिए, उपाय के लिए, हम अपनी योग्यता और
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आज का चिंतन #298 करोड़पति नहीं हजारपति… यदि कोई अमीर होता है तो कहते हैं कि वह करोड़पति है। धन, समृद्धि का पैमाना माना जाता है। दूसरी और किसी भी विधा में श्रेष्ठता का आकलन इस बात से होता है कि आपने उस विधा में कितने सौ या हजार घंटे दिए हैं, लगाए हैं। महारत…यदि
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आज का चिंतन #297 नए विचार… निरंतर… प्रतिदिन हमें हजारों विचार आते हैं और चले जाते हैं। विचारणीय यह है कि हम उनमें से कितनों पर कार्य करते हैं, कितनों को सहेज कर रख पाते हैं। विचार और कार्य…जिस विचार पर कार्य किया जा सके, वही विचार महत्वपूर्ण और सार्थक होता है अन्यथा व्यर्थ के
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आज का चिंतन #296 कारण.. समय बीतने के बाद… यदि किसी को कोई काम दिया और वह उस काम को नहीं कर पाया और उसने बताया भी नहीं और समय बीत गया और बाद में पूछने पर यदि उसने काम नहीं होने का कोई भी कारण बताया तो अब इस बताने का कोई महत्व नहीं
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आज का चिंतन #295 वो अपने आप में गुम है… जिसे भी देखिए, वो अपने आप में गुम है…जुबां मिली है मगर हमजुबां नहीं मिलता…किसी गजल का यह शेर पढ़ा तो लगा कि यही आज की सच्चाई है। आज जब सबके हाथ में मोबाइल है और सारे काम मोबाइल पर हो रहे हैं तो यह
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आज का चिंतन #294 समाधान ढूंढते हैं… ऑफिस में या सामाजिक जीवन में लोग बतलाते रहते हैं कि समस्याएं बहुत हैंया फिर कि काम क्यों नहीं हो रहा है, उसके कई सारे कारण बताने लगते हैंलेकिन वह इस विषय पर बात नहीं करना चाहते कि काम कैसे हो सकता है याउपाय कैसे निकल सकता हैऔर