आज का चिंतन
Daily blogs for everyday musings
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आज का चिंतन # 312 व्हाट्सएप अखाड़ा… देखने में आता है कि कई बार व्हाट्सएप ग्रुप में सदस्यों में विचारों की अभिव्यक्ति से बात शुरू होकर प्रश्न उत्तर और फिर बहस और फिर अप्रियता और संबंधों में खराबी में बदल जाती है। सोशल मीडिया…मीडिया का कार्य समाचारों, सूचनाओं, विचारों इत्यादि को दूसरों तक पहुंचाना होता
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आज का चिंतन #311 फोन नहीं लगता… कई बार होता है कि हम दूसरे को फोन करते हैं और रिंग जाती रहती है, फोन पिक नहीं होता या पूरी रिंग गई और जवाब नहीं मिलता या एंगेज टोन सुनाई देती हैया आवाज आती है कि फोन नेटवर्क कवरेज के बाहर है या कि आपने जिन्हें
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आज का चिंतन #310 मान्यता और स्वीकार्यता… स्वीकार्यता अर्थात जो जहां है, जैसा हैउसके अस्तित्व को, उसके स्वरूप को, उसके व्यक्तित्व को, उसी रूप में, सहजता पूर्वक, बिना किसी आंतरिक विरोध के, स्वीकार कर लेना। स्वीकार्यता का अर्थ उसकी बातों को, उसके सिद्धांतों को हमने पूरी तरह मान लिया है, ऐसा नहीं होता हैलेकिन इसका
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आज का चिंतन #309 दिल है छोटा सा… एक गीत की पंक्तियां है दिल है छोटा सा छोटी सी आशा…कहा जाता है कि उम्मीद पर दुनिया कायम हैजब तक सांस है तब तक आस हैकुछ अच्छा हो जाए, कुछ मनचाहा हो जाए, इसकी आशा हमेशा मन में रहती है। यह होना ईश्वर के, प्रकृति के
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आज का चिंतन #308 उत्सुकता और आशंका…. भविष्य अनिश्चित होता है और इसे लेकर मन में भाव आते हैं कि आगे क्या होगा? यदि मन में आशा का सकारात्मक भाव है तो उसे उत्सुकता कहते हैं और यदि मन में भय का यह भाव है कि कहीं कुछ बुरा ना हो जाए, गलत ना हो
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आज का चिंतन #307 प्रेम समन्वय और स्वीकार्यता… किसी ने कहा कि आप हिंदी लिखते समय अंग्रेजी या अन्य भाषाओं के शब्दों का प्रयोग ना करें, क्योंकि मुझे हिंदी से प्रेम है।तो दिमाग में कौंधा कि क्या प्रेम समन्वय और स्वीकार्यता से रहित है। एकाधिकार…प्रेम एकाधिकार चाहता है तो क्या शेष अस्तित्व को नकार दिया
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आज का चिंतन #306 जिम्मेदार कौन…. यदि हमें दूसरों से दिक्कत हो रही है, परेशानी हो रही है, तकलीफ हो रही है, दुख हो रहा है तो इसका जिम्मेदार कौन है? इसका जिम्मेदार केवल हमारी सोच है। दूसरे का हमारे प्रति व्यवहार, उसकी अपनी सोच, समझ , इच्छा, क्षमता और प्राथमिकता के अनुसार होता है
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आज का चिंतन #305 सलाह देना.. सलाह हमेशा मांगने पर ही दी जानी चाहिए। सलाह देने के पहले विषय को पूरी तरह समझ लेना चाहिए, उसके सारे पहलुओं को जान लेना चाहिए, उसके बाद ही सलाह दिए जाने की सार्थकता होती है। समझाइश…माता पिता द्वारा बच्चों को बार-बार समझाइश जाती है, उससे बच्चे चिढ़ जाते
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आज का चिंतन #304 भय से मुक्ति.. भय के प्रमुख कारण शारीरिक अक्षमता, मन की कमजोरी, जानकारी का अभाव, दूरी या अंजानापन, अविश्वास, अनहोनी की आशंका, आत्मविश्वास की कमी, पुराने कटु अनुभव इत्यादि होते हैं। डर से मुक्ति..यदि कारण समाप्त हो जाए तो निवारण हो जाता है, चाहे वह डर हो, बीमारी हो या अन्य
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आज का चिंतन #303 तोरा मन दर्पण कहलाए.. तोरा मन दर्पण कहलाएभले बुरे सारे कर्मों को, देखे और दिखाए।सही बात है कि मन से कुछ छुपा नहीं है।और मन ज्यों का त्यों, सब कुछ दिखा देता है।मन से कुछ छुपाया नहीं जा सकता और झुठलाया भी नहीं जा सकता सही गलत…जब भी हम कुछ करते