अनुभूतियों का संग्रह 346

आज का चिंतन # 346

अनुभूति संग्रह…

हम भौतिक वस्तुओं का, साधनों का, धन इत्यादि का संग्रह करते हैं, जिनसे हमें सुख तो मिलता है लेकिन आनंद नहीं। आनंद एक आंतरिक अवस्था है और यह सुखद अनुभूतियों से मिलता है और ऐसी अनुभूतियों के संग्रह को हमें निरंतर बढ़ाते रहना होता है।

लम्हों में जिंदगी..
कहीं पढ़ा था कि
“लम्हों की खुली किताब हैं ज़िन्दगी,
ख्यालों और सांसों का हिसाब हैं ज़िन्दगी।
कुछ ज़रूरतें पूरी, कुछ ख्वाहिशें अधूरी,
इन्ही सवालों के जवाब हैं ज़िन्दगी।”
एक गाना यह है कि
जिंदगी के सफर में गुजर जाते हैं जो मकाम वह फिर नहीं आते…
इसलिए हर पल जियो जी भर के जियो।

सुख-दुख…
सुख दुख, यह केवल अनुभूतियां ही तो हैं।
परिस्थितियों के अनुकूल या प्रतिकूल होने से ही
हम सुख या दुख को उनसे जोड़ लेते हैं
या उनका अनुभव कर लेते हैं।
सुख-दुख से परे हो जाना, परिपक्वता की उच्चतम स्थिति है, आध्यात्मिकता का प्रवेश द्वार है।

क्या करें…
अपनी सोच, व्यवहार और अनुभूतियों के प्रति हमेशा सचेत रहें, जागरूक रहें।
जो भी अनुभूति होती है उसमें आनंद प्राप्त करें
अन्यथा उस अनुभूति से अपनी
सीख और समझ को विकसित करें,
यही अभीष्ट होता है।

संजय अग्रवाल
संपर्क संवाद सृजन समाधान
9406717823
शुक्रवार 13 मार्च 2026

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