व्यवहार… बीमारी का इलाज? 345

आज का चिंतन # 345

व्यवहार….. बीमारी या इलाज?…

कई बार व्यक्ति कहता है कि मेरा तो व्यवहार ऐसा ही है तो प्रश्न आता है कि यह उसका अहंकार है, मजबूरी है, नादानी है, क्या है? व्यवहार क्या परिवर्तनशील नहीं होता?

सोच और व्यवहार…
हमारी सोच, हमारे विचार नितांत व्यक्तिगत विषय होता है, लेकिन हमारा व्यवहार, दूसरों से जुड़ा हुआ विषय होता है और इसलिए अपने व्यवहार के साथ जुड़े हुए अन्य पहलू जैसे दूसरों की अपेक्षाओं, भावनाओं इत्यादि से हम स्वयं को मुक्त नहीं कर सकते। हमारा व्यवहार हमारे व्यक्तित्व, हमारे विचारों की गहनता और परिपक्वता को भी प्रदर्शित करता है।

व्यवहार का प्रभाव…
डॉक्टर, टीचर, मनोवैज्ञानिक, कंसल्टेंट इत्यादि की बातचीत और व्यवहार, उनकी क्षमता और उनके कार्य की दक्षता को दर्शाता है। व्यवहार से हम किसी को अपना बना सकते हैं या अपने से दूर कर सकते हैं; हालांकि यह दूसरे की समझ और परिपक्वता पर भी निर्भर करता है।

क्या करें…
हमें जांचना होता है कि हमारा व्यवहार बीमारी का रूप है या यह इलाज की क्षमता रखता है। ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोय..
हमारा व्यवहार संतुलित हो, परिपक्व हो, सुखदाई हो, उत्साह और ऊर्जा को बढ़ाने वाला हो, यही अभीष्ट होता है।

संजय अग्रवाल
संपर्क संवाद सृजन समाधान
9406717823
गुरुवार 12 मार्च 2026
नागपुर

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