आज का चिंतन # 341
होली और क्षमा पर्व …
एक गीत की पंक्तियां हैं कि..
होली के दिन दिल मिल जाते हैं…
सारे गिले शिकवे भूल कर
दुश्मन भी गले मिल जाते हैं…
होली के दिन आपस में सभी प्रकार का
क्रोध, वैमनस्य, दुश्मनी, दुराव इत्यादि
को हटाकर, प्रेम से गले मिलकर,
संबंधों को सुदृढ़ बनाया जाता है,
उन्हें नए सिरे से गढ़ लिया जाता है।
क्षमा पर्व…
जैन धर्म में क्षमा मांगने की महत्वपूर्ण परंपरा है, जहां हम विनम्र होकर, अपना अहंकार छोड़कर, स्वयं के द्वारा, जाने अनजाने में हुई गलतियों के लिए दूसरों से क्षमा मांगते हैं। यह आत्मिक शुद्धिकरण का एक निमित्त होता है।
और ठीक यही बात होली पर भी लागू होती है, जहां न केवल हम दूसरों को क्षमा करते हैं बल्कि दिल से उन्हें अपनाने की शुरुआत भी करते हैं, आपसी प्रेम और अपनेपन की निरंतरता को बनाए रखते हैं।
कहावत…
कोई बहुत लंबे समय तक रूबरू ना मिले तो कहा जाता है कि भाई होली दिवाली तो मिल लिया करो; अर्थात यह दोनों इतने महत्वपूर्ण पर्व हैं कि जहां आपस में मिलना जुलना अनिवार्य होता है और इस बहाने से आपसी प्रेम, सद्भाव हमेशा बना रहता है, रिश्तो में झाड़ पोंछ हो जाती है।
क्या करें…
सोशल मीडिया पर बधाई भेजने के अलावा, जहां तक संभव हो, व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर ली जाए या कम से कम फोन पर बातचीत अवश्य कर ली जाए तो दोतरफा बातचीत हो जाती है, समाचार मिल जाते हैं, अच्छा महसूस होता है।
संजय अग्रवाल
संपर्क संवाद सृजन समाधान
9406717823
गुरुवार 5 मार्च 2026
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