आज का चिंतन # 340
खोज और संघर्ष…
सिद्धार्थ गौतम सत्य की खोज में निकले और बुद्ध हो गए। क्रिस्टोफर कोलंबस भारत की खोज में निकले और उन्होंने अमेरिका को खोज लिया। खोज प्रयास पूर्वक होती है और संघर्ष जीवन का स्वाभाविक अंग या हिस्सा होता है।
अनपेक्षित, आकस्मिक..
जीवन में सब कुछ हमारी सोच के अनुसार नहीं होता। बहुत बार हमारे अनुमान के विपरीत या हमारी सोच के बाहर की घटना घट जाती हैं या स्थितियां सामने आ जाती हैं, जिनका सामना हमें अपने अनुभव और साहस से करना ही पड़ता है।
आगे बढ़ने के लिए..
जीवन का मार्ग कभी आसान होता है तो कभी कंटकाकीर्ण हो सकता है; इसीलिए जीवन में हमें हर प्रकार के संघर्ष के लिए स्वयं को तैयार करना होता है, प्रस्तुत करना होता है।
मन के हारे हार है, मन के जीते जीत
क्या करें..
नियमित रूप से यथासंभव, यत्नपूर्वक कुछ नया करें, कुछ खोजें और पाएं। अनिवार्य संघर्ष से कभी भागे नहीं; वहीं दूसरी ओर अनावश्यक संघर्ष से स्वयं को बचाएं और अपने समय और ऊर्जा को उपयोगी और सार्थक कार्यों में लगाएं, यही अभीष्ट होता है।
संजय अग्रवाल
संपर्क संवाद सृजन समाधान
9406717823
शुक्रवार 6 फरवरी 2026
नागपुर
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