रुचि… इंट्रेस्ट…339

आज का चिंतन # 339

रुचि…. इंट्रेस्ट…

एक कथन है कि नथिंग इस इंटरेस्टिंग इफ यू आर नॉट इंटरेस्टेड अर्थात यदि आपकी रुचि नहीं है तो कोई भी चीज रुचिकर नहीं है। एक ही निश्चित प्रकार की वस्तु, व्यक्ति, क्रिया या वातावरण के प्रति, हर व्यक्ति का आकर्षण या रुचि भिन्न-भिन्न होती है और यह उसकी स्वयं की प्रकृति, मानसिकता और पसंद, नापसंद इत्यादि पर निर्भर करता है।

नैसर्गिक गुण…
किसी भी विषय, कार्य इत्यादि में रुचि होना एक नैसर्गिक गुण होता है और यह जबरन पैदा नहीं किया जा सकता है, केवल इसे जान लिया जाता है; और कई बार इसकी अनुभूति आसानी से नहीं होती; और अगर यह होती भी है तो व्यक्ति दूसरे आकर्षण या प्रभाव के कारण इसको इगनोर या नजरअंदाज कर देता है लेकिन जीवन में अंततः कभी न कभी, यह उभर कर आ ही जाती है।

जीवन…
कहा जाता है कि वह काम करो, जो तुम्हें पसंद हो या फिर तुम जो काम कर रहे हो, उसे पसंद करो अन्यथा जीवन दुष्कर हो जाता है। जीवन में अपनी नैसर्गिक रुचि और क्षमता के अनुसार काम करना हमेशा श्रेयस्कर होता है।

क्या करें…
अपनी स्वाभाविक रुचि को पहचानने का प्रयास करें कि जिस काम को करते हुए हम संपूर्ण मनोयोग से उसमें जुट जाएं और लगे रहें और समय सीमा भूल जाएं; किसी भी दबाव, प्रभाव या प्रतिकूलता में भी इसका दमन या शमन नहीं करें और पूर्ण आत्मविश्वास से अपनी राह पर आगे बढ़ें और निरंतर चलते रहें, यही अभीष्ट होता है।

संजय अग्रवाल
संपर्क संवाद सृजन समाधान
9406717823
गुरुवार 5 फरवरी 2026

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