आज का चिंतन # 337
मैसेज का महत्व…
किसी भी कार्य के संबंध में चर्चा, विमर्श इत्यादि के लिए प्रत्यक्ष भेंट या रूबरू मुलाकात सर्वोत्तम होती है; लेकिन यदि यह संभव न हो तो फोन पर बातचीत, चर्चा करना आवश्यक और महत्वपूर्ण होता है; और यदि किसी कारण से बात नहीं हो पाई है तो मैसेज करना अनिवार्य हो जाता है कि मैंने आपको फोन किया था, बात नहीं हो पाई है, और मैं आपसे फलाने विषय में बात करना चाहता था।
लगता है…
कई बार हमें लगता है कि फोन पर रिंग गई है और अगले ने फोन नहीं उठाया किंतु वास्तव में होता यह है कि किसी तकनीकी कारण से सामने वाले तक वह रिंग पहुंची ही नहीं जबकि हम समझ रहे होते हैं कि हमने फोन किया तो सामने वाला कॉल बैक कर लेगा, और वह कॉल बैक उक्त कारण से कभी होता नहीं है, और हम भ्रम अथवा शिकायत का शिकार हो जाते हैं; इस स्थिति या संकट से बचने के लिए भी मैसेज करना अनिवार्य हो जाता है।
मैसेज से काम होता..
अधिकतर यह अनुभव में आया है कि यदि हमने मैसेज में विषय या प्रश्न लिखकर भेजा है तो तत्काल कॉल बैक आ जाता है; या सामने वाले से मैसेज प्राप्त हो जाता है और उसमें हमारे प्रश्न का उत्तर मिल जाता है या चाही गई जानकारी मिल जाती है और हमारा काम बन जाता है; इससे समय भी बचता है और संभावित परेशानी, देरी, संदेह, संबंधों में बिगाड़ इत्यादि से भी हम स्वयं को बचा लेते हैं।
क्या करें..
फोन पर बात न हो पाए तो मैसेज अवश्य करें। कॉल बैक नहीं आने पर, सामने वाले के बारे में गलत अनुमान कदापि न लगाएं और उसकी वास्तविक स्थिति को जानने, समझने का प्रयास करें। मैसेज प्राप्त होने पर एवं कार्य हो जाने के बाद, सामने वाले को धन्यवाद का फोन या मैसेज अवश्य करें जिससे उसको प्रसन्नता एवं संतुष्टि का अनुभव हो; इससे संबंध भी सुदृढ़ होते हैं और यही अभीष्ट होता है।
संजय अग्रवाल
संपर्क संवाद सृजन समाधान
9406717823
रविवार 1 फरवरी 2026
नागपुर
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