आज का चिंतन 336

आज का चिंतन # 336

गहरे पानी पैठ…
जिन खोजा तिन पाइयां, गहरे पानी पैठ,
मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ।।
आजकल व्यस्तता, दिखावे, भागमभाग, होड़, प्रतिस्पर्धा के जीवन में हम विस्तार और फैलाव में रम गए हैं और ठहरकर, केंद्रित होकर, तसल्ली से गहराई में जाकर; पढ़ना, करना, सोचना, जानना कदाचित भूल गए हैं और तब कबीर दास जी का उक्त दोहा बहुत प्रासंगिक और समीचीन हो जाता है।

फटाफट..
आजकल सामान और जानकारी की उपलब्धता तत्काल हो रही है; लेकिन समझ और अनुभव की कमी हो रही है जिसके लिए धैर्य, एकाग्रता, चिंतन, मनन, चर्चा, विश्लेषण, प्रयोग, प्रयास में निरंतरता की आवश्यकता होती है।

जल्दबाजी..
बात करने में, काम करने में, व्यवहार करने में, इतनी जल्दबाजी क्यों है कि दिशा बिगड़ जाए, अपूर्णता बनी रहे अथवा उद्देश्य की प्राप्ति भी न हो और यदि हो भी तो वह वांछित मात्रा, गुणवत्ता में न हो। कई बार तो हड़बड़ी में गड़बड़ी भी हो जाती है।

क्या करें..
कोई भी कार्य धैर्य, गंभीरता, और समझदारी से करें; उसमें उचित और आवश्यक, समय और ऊर्जा अवश्य दें; अनावश्यक हड़बड़ी न करें; व्यर्थ की जल्दबाजी के संभावित नुकसान से स्वयं को बचाएं; किसी भी कार्य में अथवा सृजन में, समय और गुणवत्ता का तालमेल बनाए रखें; अनुभव की गहराई को प्राप्त करें; यही अभीष्ट होता है

संजय अग्रवाल
संपर्क संवाद सृजन समाधान
9406717823
शनिवार 24 जनवरी 2026
भोपाल

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