आज का चिंतन # 334
शब्दों की ताकत…
शब्द अभिव्यक्ति का माध्यम हैं। शब्दों से ही संवाद किया भी जाता है और संवाद प्रभावित भी होता है इसलिए शब्दों का उपयोग बहुत ही सजगतापूर्वक किया जाना चाहिए और दूसरों के द्वारा बोले गए शब्दों के पीछे छुपे हुए अर्थ को समझने में भी सतर्कता रखनी चाहिए।
शब्द स्वतंत्र नहीं होते हैं..
शब्दों से जुड़े हुए होते हैं संदर्भ, मनोभाव, उद्देश्य, पूर्व के अनुभव इत्यादि। प्रत्यक्ष रूप से कहे गए शब्दों को समझना, लिखे गए शब्दों की तुलना में आसान होता है। लेकिन यदि कहने वाले के पास शब्दों का, या कहने के तरीके का अभाव है; तो शब्दों से परे जाकर भी उसके मनोभाव और उद्देश्य को समझने का प्रयास करना होता है।
शब्द का प्रभाव..
शब्द यदि आपके विचारों, व्यवहार और आचरण से मेल नहीं खाते तो वह केवल कोरे शब्द ही रह जाते हैं और निष्प्रभावी सिद्ध होते हैं। असत्य शब्दों से मान मर्दन तो होता ही है। विश्वसनीयता के लिए आपके शब्दों की, आपके भाव से अनुकूलता और साम्यता; अपेक्षित और अनिवार्य होती है।
क्या करें..
जब भी विषय परक या सार्थक संवाद करें तो उचित, न्यूनतम और आवश्यक शब्दों का ही प्रयोग करें, अनावश्यक और व्यर्थ के शब्दों से बचें और बचाएं। शब्दों में मर्यादा का उल्लंघन न हो और विनम्रता एवं दृढ़ता से अपनी बात रखी जाए, यही अभीष्ट होता है।
संजय अग्रवाल
संपर्क संवाद सृजन समाधान
9406717823
सोमवार 12 जनवरी 2026
नागपुर
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