आज का चिंतन 332

आज का चिंतन # 332

समय देना पड़ता है..

आज दौड़ भाग की जिंदगी में बहुत तेजी है; वाहनों की गति तेज, सामान की सप्लाई तेज, सूचना का संप्रेषण तत्काल इत्यादि। लेकिन कुछ अच्छा सोचने, समझने और करने के लिए, समय देना ही पड़ता है।

प्रकृति..
प्रकृति के अपने नियम हैं और अपनी गति है। सृजन में समय लगता है, विकसित होने में समय लगता है और यही बात मनुष्य पर भी लागू होती है। किसी भी कार्य को संपन्न करने के लिए उचित और पर्याप्त समय देना पड़ता है, और उससे अधिक समय देरी होना कहलाता है।

जल्दबाजी..
ज्यादातर अनुभव में आता है कि हड़बड़ी में गड़बड़ी होती है। इसलिए जो कुछ भी करें, वो शांत दिमाग से और पूरी ऊर्जा और उत्साह के साथ करें, तभी वह उत्कृष्ट होता है। सभी संसाधनों का उपयोग एवं लोगों का सहयोग भी आवश्यकतानुसार यथोचित रूप से लिया जाये तो न्यूनतम समय में अधिकतम कार्य संपन्न हो सकता है।

क्या करें…
अपने कार्यों की रूपरेखा बना लें, समय को इधर-उधर व्यर्थ करने से स्वयं को बचाते हुए, कार्य में संलग्न हो जाएं और समय के उचित नियोजन के अनुसार कार्य के पूर्ण होने तक प्रयासों में निरंतरता रखें, यही अभीष्ट होता है।

संजय अग्रवाल
संपर्क संवाद सृजन समाधान
9406717823
गुरुवार 8 जनवरी 2026
नागपुर

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