आज का चिंतन # 330
कम और कमी..
एक गीत की पंक्तियां है कि
दुनिया में कितना गम है, मेरा गम कितना कम है
हमारा दुख कम हो जाएगा यदि दूसरों के दुख का हमें पता चल जाए।
एक कहावत है कि जीवन में स्वस्थ और सुखी रहना है तो
कम खाओ गम खाओ
अर्थात भूख से थोड़ा कम खाओगे तो स्वस्थ रहोगे, और जीवन में थोड़ा बर्दाश्त करके चलोगे तो सुखी रहोगे।
हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले
गालिब का यह शेर बतलाता है कि मन का कितना भी हो जाए, लेकिन वह कम ही लगता है। इच्छाओं की कोई सीमा नहीं होती है।
सुविधा और साधन जब कम होते हैं तो उनका महत्व ज्यादा होता है, और जब वह बहुतायत में होते हैं तो उनका महत्व कम हो जाता है, यह अनुभवजन्य बात है।
कमी…
किसी के जीवन में कोई कमी ऐसी भी होती है जिसकी पूर्ति किसी भी सुविधा या साधन से नहीं की जा सकती है जैसे माता-पिता की कमी, शरीर के किसी अंग में कोई कमी इत्यादि
जीवन में ऐसी कमी होने पर भी लोगों ने अपनी क्षमता और प्रतिभा का उपयोग करके सफलता के मुकाम हासिल किये हैं।
क्या करें…
जो प्राप्त है वही पर्याप्त है यह सोचकर उपलब्ध साधन और सुविधा के लिए कृतज्ञता महसूस करें। यदि जीवन में कोई कमी है भी, तो उसका मलाल करने की बजाय, अपनी प्रगति और सफलता के लिए, अपनी संपूर्ण क्षमता, ऊर्जा, शक्ति और चेतना से अपने प्रयास जारी रखें। अपने प्रयासों में अपना सर्वस्व समर्पित कर दें और इसमें कोई कमी कतई न रखें। ऐसा करने से ही हमें आत्मसंतोष प्राप्त होता है और जीवन में यही अभीष्ट होता है।
संजय अग्रवाल
संपर्क संवाद सृजन समाधान
9406717823
मंगलवार 23 दिसंबर 2025
नागपुर
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