आज का चिंतन 328

आज का चिंतन # 328

हमारे हाथ में क्या है..

एक बुजुर्ग से बातचीत के दौरान उनका कथन आया कि हम लिख सकते हैं, अपने विचार दूसरों तक पहुंचा सकते हैं इसके अलावा हमारे हाथ में क्या है..

करने को बहुत कुछ है..
स्वयं की सेहत के लिए योग, व्यायाम, खानपान का ध्यान; लोगों से यथासंभव मिलना जुलना; प्रत्यक्ष अथवा फोन के माध्यम से बातचीत करना, हाल-चाल लेना, अनुभव साझा करना और समाधान बतलाना; लोगों द्वारा किए जा रहे अच्छे काम की चर्चा करना, उसकी सूचना, जानकारी दूसरों तक पहुंचाना; जरूरतमंद की यथाशक्ति सहायता करना; आवश्यकता अनुसार लोगों को हिम्मत दिलाना, उन्हें प्रोत्साहित करना, संसाधन मुहैया कराना; विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों और आयोजनों में सम्मिलित होना इत्यादि कई सकारात्मक योगदान, कार्य दिन प्रतिदिन किए जा सकते हैं।

संकोच..
रिटायरमेंट के बाद यह संकोच आड़े आ जाता है कि यदि हम लोगों को फोन करेंगे या उनसे मिलने जाएंगे तो उनको लगेगा कि यह तो फालतू हैं और हमारा समय व्यर्थ कर रहे हैं, जबकि सच्चाई हमेशा यह नहीं होती है। लोगों को मिलने की, बातों की, प्रेमपूर्ण व्यवहार की इच्छा होती है और ऐसे लोगों तक हम आसानी से पहुंच सकते हैं और यह प्रयास हमें यथासंभव अवश्य करना चाहिए।

क्या करें..
आत्मोन्नति व जगत कल्याण के लिए, जहां, जो भी प्रयास हो सकते हैं, वो हमें पूरे विश्वास, पूरे उत्साह के साथ अवश्य करना चाहिए; सहयोग भी मिलेगा और सत्कार भी।

संजय अग्रवाल
संपर्क संवाद सृजन समाधान
9406717823
रविवार 7 दिसंबर 2025
नागपुर

Leave a comment