आज का चिंतन #322
दोनों बातें…
हमें दोनों तरह की बातों का
ध्यान रखना चाहिए कि हमें
क्या करना चाहिए
और क्या नहीं करना चाहिए
क्या बोलना चाहिए
और क्या नहीं बोलना चाहिए
कहां जाना चाहिए और
कहां नहीं जाना चाहिए इत्यादि
समझदारी..
मात्र यह समझ लेना कि हमें
क्या करना है, क्या बोलना है
कहां जाना है इत्यादि
पर्याप्त नहीं होता है यदि हमारे अंदर
यह समझदारी नहीं है कि हमें
क्या नहीं करना है, क्या नहीं बोलना है,
कहां नहीं जाना है इत्यादि।
दोनों तरह की बातों पर विचार करने से ही हम उचित निर्णय लेने में सक्षम होते हैं।
व्यर्थता..
यदि हमें अपनी बातों, कार्यों, क्रियाओं इत्यादि के प्रति पूरी जागरूकता रहेगी तो हम अपने समय, ऊर्जा और संसाधनों को व्यर्थ होने नहीं देंगे और सही दिशा में, सकारात्मक और प्रभावी रूप से आगे बढ़ सकेंगे।
जीवन में आवश्यक और अनावश्यक के भेद को जान लेना ही सच्चा ज्ञान है।
क्या करें..
स्वयं के प्रति सदैव प्रतिक्षण सचेत रहें और दूसरों से अनावश्यक तुलना के विकार से खुद को बचाए रखें। व्यर्थ के विवाद और प्रतिकूल वातावरण से स्वयं को यथासंभव दूर रखें और सजगता पूर्वक प्रगति और कल्याण की दिशा में निरंतर अग्रसर रहें, यही अभीष्ट होता है।
संजय अग्रवाल
संपर्क संवाद सृजन समाधान
9406717823
गुरुवार 27 नवंबर 2025
नागपुर
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