आज का चिंतन 320

आज का चिंतन # 320

किया तो था…

यदि कोई काम अधूरा दिखे तो हम पूछते हैं कि यह काम तुमने नहीं किया तो जवाब मिलता है किया तो था। वस्तुतः होता यह है कि उसने काम तो किया है लेकिन उसे पूरा नहीं किया या कोई रुकावट आई और उसने काम छोड़ दिया और बताया भी नहीं तो ऐसे में सब किया धरा बेकार हो जाता है।

बता दिया करो…
इस स्थिति में हम उस से कहते हैं कि कम से कम बताना तो था ताकि हम कोई समाधान बताते या कोई दूसरा उपाय करते और काम को पूरा कर लेते या करवा लेते, कम से कम भरोसे में तो ना रह जाते।

विश्वास…
यदि हम किसी को कोई काम सौंपते हैं तो यह विश्वास करते हैं कि वह यह काम पूरा कर लेगा और हमें बता देगा या कोई दिक्कत, परेशानी आएगी तो वह हमसे चर्चा अवश्य कर लेगा, लेकिन ऐसा नहीं होने पर भरोसा टूटता है, परेशानी भी होती है।

क्या करें..
काम हो पाए या न हो पाए, दोनों ही स्थिति में सामने वाले को बताना अवश्य चाहिए। संवाद निरंतर बनाए रखना चाहिए और कार्य के पूर्ण होने तक फॉलो अप या अनुसरण करना चाहिए, यही अभीष्ट होता है।

संजय अग्रवाल
संपर्क संवाद सृजन समाधान
9406717823
मंगलवार 18 नवंबर 2025
नागपुर

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