आज का चिंतन # 317
व्यक्तिगत मैसेज…
जब भी किसी से व्यक्तिगत मैसेज प्राप्त होता है तो उसका जवाब अवश्य दिया जाना चाहिए या आवश्यकता अनुसार उससे फोन पर बातचीत कर लेना चाहिए। यहां व्यक्तिगत मैसेज से आशय है कि उसका लिखा हुआ संदेश न कि कोई फॉरवार्डेड मैसेज। व्यक्तिगत मैसेज का निहितार्थ यह होता है कि आपस में संवाद हो, चर्चा हो, आदान-प्रदान हो।
प्रत्यक्ष भेंट.. मुलाकात रूबरू..
समयाभाव के कारण व्यक्तिगत रूप से मिल नहीं पाते हैं और बातचीत के लिए सामने वाले की सुविधा का अनुमान नहीं होता है, इसलिए व्यक्तिगत मैसेज से संवाद करना बहुत कारगर होता है। मुद्दे की बात, काम की बात सामने वाले तक पहुंच जाती है और यदि उसकी ओर से उत्तर का मैसेज या फोन आ जाता है तो संवाद सार्थक हो जाता है।
शिष्टाचार…
लिखना यूं भी बहुत कम हो गया है और ऐसे में यदि किसी ने व्यक्तिगत रूप से कुछ लिखकर हमें भेजा है तो वह हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है और उसका उत्तर मैसेज या फोन द्वारा दिया जाना आवश्यक और अनिवार्य हो जाता है।
क्या करें..
प्रत्येक व्यक्तिगत मैसेज का उत्तर/ प्रतिक्रिया अवश्य दें, संवाद को यथासंभव निष्कर्ष तक ले जाएं, पूरी सक्रियता के साथ अपना सहयोग दें, यही अभीष्ट होता है।
संजय अग्रवाल
संपर्क संवाद सृजन समाधान
9406717823
मंगलवार 4 नवंबर 2025
नागपुर
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