आज का चिंतन 316

आज का चिंतन # 316

बताईएगा अवश्य…

जब हम दूसरों को कोई काम करने के लिए देते हैं तो यह अपेक्षा स्वाभाविक रूप से होती है कि वह एक निश्चित समय बाद हमें बतला दें कि काम हुआ या नहीं या कितना हुआ है इत्यादि। और यदि उनसे कोई सूचना प्राप्त नहीं होती है तो एक बेचैनी या निराशा या शिकायत का भाव आने लगता है। इसीलिए अनिवार्य होता है कि संवाद का क्रम टूटे नहीं और यह निरंतर चलता रहे, इससे गलतफहमी होने की संभावना लगभग नहीं के बराबर होती है।

मानसिकता..
सामने वाले की मानसिकता अधिकतर यह होती है कि जब काम पूरा हो जाए तभी बताऊं। इस चक्कर में संवाद अधूरा होता है और मानसिक परेशानी बढ़ जाती है, इससे बचा जाना चाहिए और समय समय पर प्रगति या वस्तुस्थिति से अवगत कराते रहना चाहिए।

बतलाने से..
बतलाने से लाभ या होता है कि सामने वाला संतुष्ट होता है और नए विकल्प पर चर्चा भी हो सकती है या वह आवश्यकता अनुसार कोई नई व्यवस्था या उपाय कर सकता है।

क्या करें…
समय समय पर सूचना देने में, चर्चा करने में कोई कोताही न करें, मिलकर या फोन करके या मैसेज के द्वारा अपडेट अवश्य करते रहें। इससे विश्वसनीयता बढ़ती है और यही अभीष्ट होता है।

संजय अग्रवाल
संपर्क संवाद सृजन समाधान
9406717823
रविवार 2 नवंबर 2025
नागपुर

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