आज का चिंतन 308

आज का चिंतन #308

उत्सुकता और आशंका….

भविष्य अनिश्चित होता है और इसे लेकर मन में भाव आते हैं कि आगे क्या होगा? यदि मन में आशा का सकारात्मक भाव है तो उसे उत्सुकता कहते हैं और यदि मन में भय का यह भाव है कि कहीं कुछ बुरा ना हो जाए, गलत ना हो जाए, तो उसे आशंका कहते हैं।

मन के भाव…
भविष्य को लेकर हमारे मन के भाव, हमारे पूर्व के अनुभव, दूसरों के कथन और हमारी प्रवृत्ति, प्रकृति, पृष्ठभूमि, वैचारिक शक्ति, योग्यता, क्षमता इत्यादि पर निर्भर करते हैं। यदि भविष्य के बारे में हमें कुछ सोचना ही है तो हम सदैव अच्छा ही सोचें क्योंकि हमारी सोच का प्रभाव भविष्य की घटनाओं पर न्यूनाधिक पड़ता ही है।

आशंका से तनाव…
कुछ बुरा हो जाएगा इसकी आशंका से केवल तनाव ही होता है और इसके कारण हमारी शक्ति क्षीण होती है, स्पष्टता का अभाव होता है, प्रयासों में कमी या गिरावट आती है और फलस्वरूप अधिकांशतः वांछित परिणाम प्राप्त नहीं होते हैं।

क्या करें…
नकारात्मक बातों, व्यक्तियों, विचारों इत्यादि से स्वयं को दूर रखें, स्वयं पर और प्रकृति की शक्ति पर पूरा विश्वास रखें और सकारात्मक विचारों के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास निरंतर करते रहें, यही अभीष्ट होता है।

संजय अग्रवाल
संपर्क संवाद सृजन समाधान
9406717823
बुधवार 27 अगस्त 2025
नागपुर

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