आज का चिंतन #305
सलाह देना..
सलाह हमेशा मांगने पर ही दी जानी चाहिए। सलाह देने के पहले विषय को पूरी तरह समझ लेना चाहिए, उसके सारे पहलुओं को जान लेना चाहिए, उसके बाद ही सलाह दिए जाने की सार्थकता होती है।
समझाइश…
माता पिता द्वारा बच्चों को बार-बार समझाइश जाती है, उससे बच्चे चिढ़ जाते हैं, कभी-कभी आक्रोशित होते हैं, विरोध और कुतर्क करने लगते हैं और अंततः आपसे दूर होते चले जाते हैं। बच्चों को अनावश्यक सलाह देने की कोई आवश्यकता नहीं होती है, केवल उनको समझने की आवश्यकता होती है।
समझना..
समझने के लिए आवश्यक होता है कि बच्चों को पूरी तरह से रुचिपूर्वक, ध्यानपूर्वक सुना जाए। छोटे-छोटे सारगर्भित प्रश्नों के द्वारा उनकी सोच के पीछे के आधार और कारणों को जान लिया जाए।
बातों बातों में…
बच्चों से बात करते समय उनकी बातों में ही अपनी बात को मिलाकर रख दिया जाए तो उन्हें आपकी बात कोई सलाह या आदेश प्रतीत नहीं होगी और आपकी बात का तत्व और महत्व उनकी समझ में सहज ही बैठ जाएगा। यही विधि सभी के साथ किए जाने वाले व्यवहार में लागू होती है और आपसी तालमेल के लिए यही समाधान होता है।
संजय अग्रवाल
संपर्क संवाद सृजन समाधान
9406717823
मंगलवार 29 जुलाई 2025
नागपुर
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