आज का चिंतन 302
परखना और समझना
वस्तुओं को परखा जाता है
और व्यक्तियों, प्रकृति और
परिस्थितियों को समझा जाता है।
वस्तुओं की परख उनकी गुणवत्ता और उनके मूल्य के निर्धारण के लिए की जाती है।
व्यक्ति और प्रकृति..
ईश्वर द्वारा रचित यह सृष्टि ही प्रकृति है और मनुष्य इसका एक अवयव है, हिस्सा है। प्रकृति से हमारा कभी विरोध नहीं, वह सब कुछ जस का तस हमें सदैव स्वीकार है। प्रकृति से सामंजस्य सहज है किंतु मनुष्य से नहीं, क्योंकि वहां अपेक्षाएं हैं जो कभी भी पूर्ण नहीं होती हैं। परिस्थितियों से भी सामंजस्य बिठा लिया जाता है क्योंकि उसका कोई विकल्प नहीं होता है।
व्यक्ति, सोच और व्यवहार..
जिस प्रकार प्रकृति के कोई भी दो अवयव पूरी तरह समान नहीं होते, इसी प्रकार कोई भी दो व्यक्ति, पूरी तरह समान नहीं होते, हो ही नहीं सकते। उनकी सोच और व्यवहार में भिन्नता रहेगी ही।
इस भिन्नता की समझ हो जाए, उसकी स्वीकार्यता हो जाए, तो ही विरोध समाप्त हो सकता है।
क्या करें…
हर व्यक्ति को, उसकी पृष्ठभूमि के अनुसार समझें, उसे प्रकृति का हिस्सा मानकर उसके व्यक्तित्व, सोच और व्यवहार के प्रति सहज स्वीकार्यता रखें, यथासंभव और यथोचित सामंजस्य रखें, यही उचित और अभीष्ट होता है।
संजय अग्रवाल
संपर्क संवाद सृजन समाधान
9406717823
शनिवार 19 जुलाई 2025
नागपुर
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