आज का चिंतन 301

आज का चिंतन #301

क्षमता, दक्षता और विशिष्टता

हर व्यक्ति हर कार्य नहीं कर सकता या दूसरे शब्दों में कहें तो हर कार्य के लिए उसकी क्षमता न्यूनतम से अधिकतम तक के स्तर की हो सकती है। जिस कार्य में उसकी क्षमता अधिक या कम होती है तदनुसार उसमें उसकी रुचि भी अधिक या कम होती है।

दक्षता…
रुचि के कार्यों में अथवा बार-बार किए जाने वाले कार्यों में दक्षता हो जाना स्वाभाविक है। दक्षता प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयत्न करना आवश्यक ही नहीं अपितु अनिवार्य होता है।

विशिष्टता…
दक्षता जब श्रेष्ठता की सीमा से परे हो जाए, तब वह विशिष्टता बन जाती है। इसके लिए व्यक्ति में जुनून, समर्पण और सैकड़ो घंटों का अभ्यास आवश्यक होता है।

क्या करें…
अपनी नैसर्गिक क्षमताओं को पहचानें,
कम क्षमताओं वाले कार्य में आवश्यकतानुसार दूसरों का सहयोग लें और
अधिक क्षमता वाले कार्य में दक्षता और फिर विशिष्टता अर्जित करें, हासिल करें, यही अभीष्ट होता है।

संजय अग्रवाल
संपर्क संवाद सृजन समाधान
9406717823
शुक्रवार 18 जुलाई 2025
नागपुर

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