आज का चिंतन #295

आज का चिंतन #295

वो अपने आप में गुम है…

जिसे भी देखिए, वो अपने आप में गुम है…
जुबां मिली है मगर हमजुबां नहीं मिलता…
किसी गजल का यह शेर पढ़ा तो लगा कि यही आज की सच्चाई है। आज जब सबके हाथ में मोबाइल है और सारे काम मोबाइल पर हो रहे हैं तो यह शेर बड़ा मौजूं है कि एक दूसरे से आमने-सामने बस बातचीत ही नहीं हो रही है।

दिल की बात…
दिल की बात उसी से की जा सकती है जो हमारे हालात और ख्यालातों को समझता हो। वरना तो लोग रो के पूछते हैं और हंस के उड़ाते हैं। ऐसे लोगों से सतर्क रहना पड़ता है।

सुन तो लो…
आज हर किसी के पास कहने को तो बहुत कुछ है लेकिन सुनने वाला नहीं मिलता। यदि आपने किसी को धैर्य से सुन लिया तो उसको तसल्ली हो जाती है, खुशी मिल जाती है। किसी की बातों को पूरी तरह से सुन लेना एक परोपकार के समान है।

क्या करें…
हमजुबां लोगों से बातचीत करें। समय समय पर एक दूसरे का हाल पूछते रहें। बातचीत के लिए अपनी ओर से पहल करें, इसमें कभी भी संकोच नहीं करें। प्रत्यक्ष मुलाकात हो जाए, इसके पूरे प्रयास करें अन्यथा फोन तो अवश्य ही करें, यही अभीष्ट होता है।

संजय अग्रवाल
9406717823
संपर्क संवाद सृजन समाधान
बुधवार 2 जुलाई 2025
नागपुर

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