आज का चिंतन #289
मैसेज भेज देते…
कई बार हम किसी को फोन करते हैं और बात नहीं हो पाती है। बाद में जब बात होती है तो सामने वाला कहता है कि कम से कम मैसेज तो भेज देते।
मैसेज का प्रभाव…
फोन हमारे लिए है हम फोन के लिए नहीं है। इसीलिए जब कभी फोन पर बात ना हो पाए तो मैसेज भेजने से सामने वाले को विषय का पता लग जाता है और ज्यादातर उस पर कार्यवाही हो जाती है, समय की बचत होती है।
हमें लगता है…
हमने फोन किया और रिंग गई तो हमें लगता है कि सामने वाले ने फोन पिक नहीं किया लेकिन कई बार होता यह है कि सामने वाले से कॉल कनेक्ट ही नहीं होता है और हम भ्रम में रह जाते हैं। इससे बचने के लिए उचित होता है कि हम मैसेज तो अवश्य ही भेज दें।
क्या करें..
यदि किसी से कोई कार्य है तो उस बात को मैसेज के रूप में अवश्य पहुंचा दें। हर एक व्यक्ति बहुत व्यस्त है और यदि मैसेज होता है तो भूलने की गुंजाइश बहुत हद तक कम हो जाती है। मैसेज को फॉरवर्ड करने में आसानी होती है और मैसेज पर रिप्लाई के माध्यम से फॉलो अप भी अच्छे से किया जा सकता है। संवाद का कोई भी माध्यम छूटे नहीं, यही अभीष्ट होता है।
संजय अग्रवाल
9406717823
संपर्क संवाद सृजन समाधान
शुक्रवार 13 जून 2025
नागपुर
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