आज का चिंतन #288
जवाबी पत्र…
पहले समाचारों का जो आदान-प्रदान खतों के माध्यम से होता था वह आजकल व्हाट्सएप के माध्यम से होने लगा है। खत अपनी भाषा में, अपने विचार और भावनाओं का प्रस्तुतीकरण होते थे। शब्दों के माध्यम से पूरा दृश्य प्रस्तुत कर दिया जाता था और कहते थे कि लौटती डाक से जवाब भेजना।
व्हाट्सएप के खत..
व्हाट्सएप के अधिकतर मैसेज तो फॉरवार्डेड ही होते हैं किंतु यदि किसी ने व्यक्तिगत मैसेज, लिखकर भेजा है तो वह खत के जैसा होता है। और इसलिए उसका जवाब दिया जाना एक अनिवार्य प्रोटोकॉल होता है।
उत्तर नहीं दिया तो..
यदि व्यक्तिगत मैसेज का उत्तर नहीं दिया जाए तो इसका प्रभाव आपकी विश्वसनीयता, आपसी विश्वास और संबंधों पर पड़ सकता है और कई बार जरूरी बातें या कार्य अधूरे रह जाते हैं। इसे संवादहीनता भी कहा या माना जा सकता है।
क्या करें…
व्यक्तिगत मैसेज का जवाब अनिवार्य रूप से दें और आवश्यकता पड़ने पर फोन भी करें, क्योंकि शब्दों की अपनी मर्यादा होती है और सब कुछ केवल लिखकर प्रकट नहीं किया जा सकता। अंतिम मैसेज मेरा होगा इसका अभ्यास उचित और अभीष्ट होता है।
संजय अग्रवाल
9406717823
संपर्क संवाद सृजन समाधान
सोमवार 9 जून 2025
नागपुर
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