आज का चिंतन #287
उस से जमती है…
जब किसी व्यक्ति से हमारा मन मिलता है, हम अपनी निजी बातें तक उस से शेयर कर पाते हैं, तब हम कहते हैं कि उससे मेरी जमती है..
और यदि किसी से हमारे विचार, मान्यता, रुचियों, प्राथमिकताओं इत्यादि में अंतर, भिन्नता या विपरीतता होती है तो हम कहते हैं कि उस से मेरी जमती नहीं..
स्वभाव और समझ…
जिस प्रकार प्रकृति में हर एक वनस्पति के अलग-अलग रूप और गुण होते हैं, उसी प्रकार मनुष्य में भी अलग-अलग प्रकार के स्वभाव पाए जाते हैं और उनमें समझ की मात्रा और गहराई भी अलग-अलग होती है। और इन्हीं के अनुसार परस्पर संबंध अच्छे बनते हैं या नहीं बनते हैं।
सहयोग और सहकार..
विचारों में तालमेल, शक्ति और क्षमता की अनुकूलता, लक्ष्य की समरूपता, दो लोगों में परस्पर सहयोग का कारण बनते हैं। हम आत्मनिर्भर तो होते ही हैं, किंतु कहीं कहीं पर, परस्पर निर्भर भी होते हैं।
क्या करें…
जीवन बहुत छोटा है, समय बहुत कम होता है, इसलिए विवाद और विषाद को टालते हुए, व्यर्थ के विरोध और संघर्ष से खुद को बचाते हुए, अनुकूलता और सहयोग को अपनाते हुए, निरंतर कार्य करते रहें और आगे बढ़ते रहें, यही अभीष्ट होता है।
संजय अग्रवाल
9406717823
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शनिवार 7 जून 2025
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