आज का चिंतन 282

आज का चिंतन #282

उदारमना…

कई बार हम दूसरों से
खुलकर बोल नहीं पाते, मिल नहीं पाते।
डरते हैं कि कोई हमारा फायदा न उठा ले,
कोई हमें धोखा न दे दे,
कोई हमारे रहस्य न जान ले इत्यादि।
कदाचित विश्वास से अधिक भय
और सहजता से अधिक संदेह
के वातावरण में हम अपना जीवन जीते हैं।

उदारता…
यदि हम उदारता पूर्वक व्यवहार करें
तो पाएंगे कि देने में अधिक खुशी मिलती है,
साझा करने में अधिक लाभ होता है,
दूसरों की सहायता करने में अधिक संतोष मिलता है।

सावधानी…
दूसरों के साथ व्यवहार करने में सावधानी आवश्यक होती है लेकिन इसका अर्थ यह कदापि नहीं होता है कि हम हमेशा असहज व्यवहार करें, अनावश्यक दूरी बनाकर रखें, स्वयं को उन्नति और प्रगति के अवसरों से वंचित कर लें..

क्या करें…
अपने पूरे आत्मविश्वास, पारदर्शिता, दृढ़ता, स्पष्टता और सहजता के साथ व्यवहार करें। कभी भी अनावश्यक दबाव महसूस न करें और किसी भी अनुचित बात को मान्यता नहीं दें, उसे स्वीकार नहीं करें। हम जो देते हैं, वही पाते हैं। प्रेम, विश्वास और आस्था ही जीवन के आधार हैं और यह एक अनुभूत सत्य है।

संजय अग्रवाल
9406717823
संपर्क संवाद सृजन समाधान
रविवार 25 मई 2025
नागपुर

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