आज का चिंतन #271
दाल में कंकर…
कभी-कभी किसी व्यक्ति की खराब बात या व्यवहार से हम आहत होते हैं और उसके प्रति हमारा व्यवहार सामान्य नहीं रह पाता। हालांकि उसने कइयों बार हमारे साथ अच्छी बातें और व्यवहार किए है किंतु उसकी कुछ खराब बातें हमें अखर जाती हैं।
मंशा..
हमें हमेशा यह देखना चाहिए कि सामने वाले की बातों में या व्यवहार के पीछे उसकी कोई खराब मंशा तो नहीं है?
यदि नहीं है तो गलतियां सबसे हो जाती हैं यह सोचकर हमें उन बातों को भूल जाना चाहिए और उसे क्षमा कर देना चाहिए।
जैसे खाना खाते समय कभी-कभी दाल में कंकर आ जाता है तो हम उसे फेंक देते हैं और शेष भोजन का आनंद लेते हैं। यदि ऐसा ना करके हम सिर्फ कंकर पर ही अटक जाएं तो स्वयं को अनावश्यक ही दुखी करेंगे और यह कोई बुद्धिमानी नहीं कहलाती है।
अपेक्षा…
हमें दूसरों से हर समय अच्छे व्यवहार की अपेक्षा होती है किंतु यह सदा संभव नहीं हो पाता है, विशेषकर, निकट के संबंधों में, और कदाचित इसीलिए , इन्हीं निकट के संबंधों में, मनमुटाव की स्थितियां अधिक बनती हैं।
क्या करें…
दूसरों से हमेशा आदर्श व्यवहार की अपेक्षा ना करें, स्वयं की ओर से अपना सर्वश्रेष्ठ दें, अपनी सजगता, चेतना और ऊर्जा का प्रवाह निरंतर बनाएं रखें
क्योंकि केवल यही आपके नियंत्रण में होता है और यही अभीष्ट होता है।
संजय अग्रवाल
9406717823
संपर्क संवाद सृजन समाधान
शुक्रवार 2 मई 2025
भोपाल
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