आज का चिंतन #270
*संभावना और आशंका…*
भविष्य के बारे में जब भी हम सोचते हैं तो हमें कभी सकारात्मक तो कभी नकारात्मक विचार आते हैं। जब अच्छे विचार आते हैं तो आने वाले समय में हमें बहुत सारी संभावनाएं नजर आती हैं, हमारी ऊर्जा और उत्साह में वृद्धि होती है। किंतु जब खराब विचार आते हैं तो हमारा मन अनेक प्रकार के डर और आशंकाओं से घिर जाता है।
*दो पहलू…*
संभावना और आशंका एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। क्या हो सकता है और क्या नहीं हो सकता, यही इसके मूल में होता है। अभी कुछ घटित हुआ नहीं है, जो होगा वह तो आगे होगा, किंतु उसका विचार करने मात्र से हमारी मानसिक स्थिति पर अच्छा या खराब असर पड़ जाता है।
*बचना है, बचाना है…*
स्थितियां हमारे नियंत्रण में नहीं होती है किंतु हम स्वयं को कुसंगति और कुविचारों से बचा लें, यही बुद्धिमत्ता होती है। किस वातावरण में और किन व्यक्तियों के साथ हमें रहना है या नहीं रहना है, किस प्रकार अनावश्यक विचारों से स्वयं को बचाना है, इसके लिए प्रतिक्षण सचेत रहना होता है।
*क्या करें..*
अपने पूरे आत्मविश्वास के साथ,
संभावनाओं को सामने रखते हुए,
वर्तमान क्षण की चेतना में रहते हुए,
यथासंभव अपना संपूर्ण प्रयास करें,
सभी संसाधनों और उपलब्ध सहयोग का
समग्र उपयोग और प्रयोग करते हुए,
अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें, यही अभीष्ट होता है।
संजय अग्रवाल
9406717823
*संपर्क संवाद सृजन*
गुरुवार 24 अप्रैल 2025
भोपाल
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