आज का चिंतन #267
*स्वतंत्रता और स्वच्छंदता…*
हम कुछ करना चाहें और उसके लिए कोई रोक रुकावट ना हो, कोई दबाव न हो, हम स्व विवेक और स्वेच्छा से, स्व सुविधा से कार्य कर पाएं, यह हमारी स्वतंत्रता होती है। स्वतंत्रतापूर्वक कार्य करते समय हम नीति, नियम, अनुशासन, धर्म, मर्यादा के अनुकूल आचरण, व्यवहार करते हैं, कार्य करते हैं। और जब हम उनसे परे जाने लगते हैं तो वह स्वतंत्रता, स्वच्छंदता में बदल जाती है।
स्वतंत्रता शक्ति का सदुपयोग है तो स्वच्छंदता का शक्ति का दुरुपयोग।
स्वतंत्र व्यक्ति अनुशासन का पालन करता है और स्वच्छंद व्यक्ति अनुशासनहीनता करता है।
स्वतंत्रता आदर एवं यश दिला सकती है लेकिन स्वच्छंदता अनादर एवं तिरस्कार का भागी बनाती है।
हम स्वतंत्रता और स्वच्छंदता के अंतर को समझ कर उचित व्यवहार और आचरण करें, यही अभीष्ट होता है।
संजय अग्रवाल
9406717823
*संपर्क संवाद सृजन*
सोमवार 14 अप्रैल 2025
नागपुर
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