आज का चिंतन #264

01/04/2025


आज का चिंतन #264

*कार्यस्थल पर…*

कार्यालय हो, व्यापार हो, फैक्ट्री हो, या कोई भी कार्य स्थल हो वहां पर लोगों से चाहे अनचाहे हमारे परस्पर संबंध बनते ही हैं।

*संबंधों में मर्यादा*
सगे संबंधी हों या सामाजिक संबंध हों या व्यावसायिक और कार्यालयीन संबंध हों, सभी में मर्यादा होती है कि हर किसी से, हर प्रकार की बात नहीं की जा सकती है। यहां तक कि किसी भी एक व्यक्ति से हम जीवन की 100% बातें नहीं कर सकते हैं, मित्र के सिवाय।

*चुनाव की सुविधा*
कार्यस्थल पर हमारे अधीनस्थ और हमारे तत्काल उच्च अधिकारी से संबंध निभाना हमारे लिए अनिवार्य होता है और इसे किसी भी प्रकार से, किसी भी स्थिति में टाला नहीं जा सकता।
शेष लोगों से कितने और किस प्रकार के रिश्ते रखने हैं, यह चुनने की स्वतंत्रता हमें होती है।

*क्या करें…*
किसी भी प्रकार के संबंधों में सामने वाले से अपेक्षा होती है लेकिन इस अपेक्षा की पूर्ति कभी भी पूर्णतया संभव नहीं होती है। अतः कार्य की आवश्यकता, अनुरूपता और अनुशासन के साथ स्वयं के विचार और व्यवहार का संतुलन बना कर ही हम अपनी ओर से, स्व विवेक से, संबंधों को बेहतर ढंग से निभा सकते हैं और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकते हैं और यही अभीष्ट होता है।

संजय अग्रवाल
9406717823
*संपर्क संवाद सृजन*
मंगलवार 1 अप्रैल 2025
नागपुर

One response to “आज का चिंतन #264”

  1. Snehal Moghe Avatar
    Snehal Moghe

    अति उत्तम विचार, सराहनीय

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